Awargi Shayari ( 36 )


Awargi Shayari
  • Nov 9, 2017   |   Review 208   |  

    पहले इस में इक अदा थी नाज़ था अंदाज़ था रूठना अब तो तिरी आदत में शामिल हो गया

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  • Nov 9, 2017   |   Review 450   |  

    कैसी शब है एक इक करवट पे कट जाता है जिस्म मेरे बिस्तर में ये तलवारें कहाँ से आ गईं

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  • Nov 9, 2017   |   Review 215   |  

    रिश्तों का ए'तिबार वफ़ाओं का इंतिज़ार हम भी चराग़ ले के हवाओं में आए हैं

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  • Nov 9, 2017   |   Review 187   |  

    देखिए पार हो किस तरह से बेड़ा अपना मुझ को तूफ़ाँ की ख़बर दीदा-ए-तर देते हैं

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  • Nov 9, 2017   |   Review 172   |  

    हम-सफ़र रह गए बहुत पीछे आओ कुछ देर को ठहर जाएँ

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  • Nov 9, 2017   |   Review 489   |  

    गुल आते हैं हस्ती में अदम से हमा-तन-गोश बुलबुल का ये नाला नहीं अफ़्साना है उस का

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  • Nov 9, 2017   |   Review 181   |  

    दाग़ दुनिया ने दिए ज़ख़्म ज़माने से मिले हम को तोहफ़े ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले

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  • Nov 9, 2017   |   Review 420   |  

    कब वो सुनता है कहानी मेरी और फिर वो भी ज़बानी मेरी

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  • Nov 9, 2017   |   Review 394   |  

    न अब वो शिद्दत-ए-आवारगी न वहशत-ए-दिल हमारे नाम की कुछ और शोहरतें भी गईं

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  • Nov 9, 2017   |   Review 462   |  

    आप के जाते ही हम को लग गई आवारगी आप के जाते ही हम से घर नहीं देखा गया

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  • Nov 9, 2017   |   Review 457   |  

    उसे ठहरा सको इतनी भी तो वुसअत नहीं घर में ये सब कुछ जान कर आवारगी से चाहते क्या हो

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  • Nov 9, 2017   |   Review 175   |  

    तू बू-ए-गुल है और परेशाँ हुआ हूँ मैं दोनों में एक रिश्ता-ए-आवारगी तो है

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  • Nov 9, 2017   |   Review 197   |  

    हम को आवारगी किस दश्त में लाई है कि अब कोई इम्काँ ही नहीं लौट के घर जाने का

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  • Nov 9, 2017   |   Review 156   |  

    ज़ेहन की आवारगी को भी पनाहें चाहिए यूँ न शम्ओं को किसी दहलीज़ पर रख कर बुझा

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  • Nov 9, 2017   |   Review 507   |  

    लोगो भला इस शहर में कैसे जिएँगे हम जहाँ हो जुर्म तन्हा सोचना लेकिन सज़ा आवारगी

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  • Nov 9, 2017   |   Review 488   |  

    लाएगी गर्दिश में तुझ को भी मिरी आवारगी कू-ब-कू मैं हूँ तो तू भी दर-ब-दर हो जाएगा

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  • Nov 9, 2017   |   Review 179   |  

    होंटों को रोज़ इक नए दरिया की आरज़ू ले जाएगी ये प्यास की आवारगी कहाँ

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  • Nov 9, 2017   |   Review 175   |  

    हमारी मुफ़्लिसी आवारगी पे तुम को हैरत क्यूँ हमारे पास जो कुछ है वो सौग़ातें तुम्हारी हैं

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  • Nov 9, 2017   |   Review 192   |  

    अजीब फ़ुर्सत-ए-आवारगी मिली है मुझे बिछड़ के तुझ से ज़माने का डर नहीं है कोई

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  • Nov 9, 2017   |   Review 369   |  

    मिरी आवारगी ही मेरे होने की अलामत है मुझे फिर इस सफ़र के ब'अद भी कोई सफ़र देना

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  • Nov 9, 2017   |   Review 193   |  

    दिल कब आवारगी को भूला है ख़ाक अगर हो गया बगूला है

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  • Nov 9, 2017   |   Review 210   |  

    फैलती जा रही है ये दुनिया जश्न-ए-आवारगी मनाने में

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  • Nov 9, 2017   |   Review 209   |  

    Dil Ke Liye Dard Bhi Roz Naya Chahiye Zindagi To Hi Bata Kaise Jiya Chahiye Maano Meri Kazmi, Tum Ho Bhaley Aadmi Phir Wohi Aawargi, Kuch To Haya Chahiye…

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  • Nov 9, 2017   |   Review 228   |  

    जो अधूरा हो मगर फिर भी पूरा लगता हो सिवाय इश्क के है ऐसा कोई मुकाम नहीं

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